26 जून 2020 - 13:21
बग़दाद स्थित इराक़ी हिज़्बुल्लाह के मुख्यालय पर छापा, कई कमांडरों को पकड़ कर अमरीका के हवाले करने का आरोप

बग़दाद स्थित इराक़ी स्वयं सेवी बल हशदुश्शाबी की एक ब्रिगेड कतायब हिज़्बुल्लाह के मुख्यालय पर आतंकवाद निरोधक दस्ते की छापेमारी और उसके कई लड़ाकों को हिरासत में लिए जाने की घटना से इराक़ में अमरीका की भूमिका संदेह के घेरे में है।

शुक्रवार को तड़के आतंकवाद निरोधक बलों ने दक्षिणी बग़दाद स्थित इराक़ी हिज़्बुल्लाह के मुख्यालय पर धावा बोलकर उसके एक दर्जन से ज़्यादा सदस्यों को गिरफ़्तार कर लिया।

सूत्रों का कहना है कि गिरफ़्तार होने वालों में इराक़ी सुरक्षा बलों के साथ मिलकर आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अमरीका विरोधी इस संगठन के कई कमांडर भी शामिल हैं।

हालांकि शुक्रवार को इस घटना के बाद आने वाली कुछ रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि आम लोगों के दबाव में गिरफ़्तार किए गए हिज़्बुल्लाह के सदस्यों को आज़ाद कर दिया गया है, लेकिन देश के दो अहम सैन्य विभागों के बीच इस तरह की घटना कोई सामान्य बात नहीं है।

इस बीच, प्रेस टीवी ने नाम ज़ाहिर किए बग़ैर इराक़ के कुछ अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि हिरासत में लिए गए कतायब हिज़्बुल्लाह के कमांडरों को अभी तक आज़ाद नहीं किया गया है, वहीं हशदुश्शाबी के कुछ सूत्रों का कहना है कि गिरफ़्तार होने वाले सदस्यों को इराक़ में मौजूद अमरीकी सैनिकों के हवाले कर दिया गया है।

इससे पहले रॉयटर्ज़ ने एक इराक़ी अधिकारी के हवाले से सूचना दी थी कि इराक़ी हिज़्बुल्लाह के गिरफ़्तार किए गए कम से कम तीन कमांडरों को अमरीका के हवाले कर दिया गया है।

स्थानीय मीडिया का कहना है कि हिज़्बुल्लाह के दफ़्तर पर छापेमारी में अमरीकी सैनिक भी शामिल थे।

वहीं हशदुश्शाबी के एक सदस्य ने ट्वीट करके दावा किया है कि इस घटना पर इराक़ी प्रधान मंत्री मुस्तफ़ा अल-काज़मी ने हशदुश्शाबी के प्रमुख हादी अल-आमेरी से माफ़ी मांगी है।

ग़ौरतलब है कि दाइश के ख़िलाफ़ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्वयं सेवी बल हशदुश्शाबी को अमरीका और इस्राईल, इराक़ में अपने हितों के लिए ख़तरा समझते हैं, इसीलिए वे उसे ख़त्म करने के लिए कई तरह की साज़िशें रच रहे हैं।   

इराक़ से अमरीकी सैनिकों के बाहर निकलने का मुद्दा गर्माता जा रहा है और हशदुश्शाबी में शामिल सभी स्वयं सेवी बल यह चेतावनी दे चुके हैं कि अगर अमरीकी सैनिक उनके देश से नहीं निकले तो वे सशस्त्र प्रतिरोध के बल पर उन्हें भागने के लिए मजबूर कर देंगे।